कोयंबटूर के मैकेनिकल इंजीनियर एस कुमारस्वामी ने डिस्टिल्ड वाटर से चलने वाला इंजन बनाया है। यह
अपने आप में एक अलग तरह का इंजन है, जो ईको-
फ्रेंडली भी है। ईको-फ्रेंडली इसलिए है, क्योंकि यह
ऑक्सीजन छोड़ता है और एस. कुमारस्वामी फ्यूल यानी ईंधन के तौर पर हाइड्रोजन का इस्तेमाल करता है।
इंजीनियर एस. कुमारस्वामी को अपनी इस खोज में भारत में सहयोग नहीं मिलने के बयान के बाद ट्विटर पर लोगों ने कई तरह की टिप्पणी की। एक यूजर ने लिखा कि हम कब तक इस तरह की अनदेखी करेंगे। जिस अधिकारी ने इन्हें अपना आविष्कार दिखाने का मौका नहीं दिया, उससे जवाब मांगा जाना चाहिए। एक यूजर ने लिखा कि सरकार ने ऐसे आविष्कार के लिए सभी दरवाजे खोल रखे हैं।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती तेल की कीमत के बीच इस
आविष्कार को वरदान समझा जा रहा है। के कारण एस कुमारस्वामी लेकिन इस इंजन को भारत के बदले जापान आविष्कार को जापान में लॉन् में लन्च किया जाएगा। प्रशासनिक उदासीनता है। इंजीनियर एस कुमारस्वार्म
- इंजन को विकसित करने में उन्हें 10 साल लग गए। मेरा सपना था कि मैं इस इंजन को सबसे पहले भारत के लोगों के सामने प्रस्तुत करूं। इसके लिए मैंने इंजीनियर एस. कुमारस्वामी को अपनी इस खोज में भारत में सहयोग नहीं मिलने के बयान के बाद ट्विटर पर लोगों ने कई तरह की टिप्पणी की।
एक यूजर ने लिखा कि हम कब तक इस तरह की अनदेखी करेंगे। जिस अधिकारी ने इन्हें अपना आविष्कार दिखाने का मौका नहीं दिया, उससे जवाब मांगा जाना चाहिए। एक यूजर ने लिखा कि सरकार ने ऐसे आविष्कार के लिए सभी दरवाजे खोल रखे हैं। है।
अपने आप में एक अलग तरह का इंजन है, जो ईको-
फ्रेंडली भी है। ईको-फ्रेंडली इसलिए है, क्योंकि यह
ऑक्सीजन छोड़ता है और एस. कुमारस्वामी फ्यूल यानी ईंधन के तौर पर हाइड्रोजन का इस्तेमाल करता है।
इंजीनियर एस. कुमारस्वामी को अपनी इस खोज में भारत में सहयोग नहीं मिलने के बयान के बाद ट्विटर पर लोगों ने कई तरह की टिप्पणी की। एक यूजर ने लिखा कि हम कब तक इस तरह की अनदेखी करेंगे। जिस अधिकारी ने इन्हें अपना आविष्कार दिखाने का मौका नहीं दिया, उससे जवाब मांगा जाना चाहिए। एक यूजर ने लिखा कि सरकार ने ऐसे आविष्कार के लिए सभी दरवाजे खोल रखे हैं।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती तेल की कीमत के बीच इस
आविष्कार को वरदान समझा जा रहा है। के कारण एस कुमारस्वामी लेकिन इस इंजन को भारत के बदले जापान आविष्कार को जापान में लॉन् में लन्च किया जाएगा। प्रशासनिक उदासीनता है। इंजीनियर एस कुमारस्वार्म
- इंजन को विकसित करने में उन्हें 10 साल लग गए। मेरा सपना था कि मैं इस इंजन को सबसे पहले भारत के लोगों के सामने प्रस्तुत करूं। इसके लिए मैंने इंजीनियर एस. कुमारस्वामी को अपनी इस खोज में भारत में सहयोग नहीं मिलने के बयान के बाद ट्विटर पर लोगों ने कई तरह की टिप्पणी की।
एक यूजर ने लिखा कि हम कब तक इस तरह की अनदेखी करेंगे। जिस अधिकारी ने इन्हें अपना आविष्कार दिखाने का मौका नहीं दिया, उससे जवाब मांगा जाना चाहिए। एक यूजर ने लिखा कि सरकार ने ऐसे आविष्कार के लिए सभी दरवाजे खोल रखे हैं। है।
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