Tuesday, May 14, 2019

जब पिता करते हैं घर के काम, तो बेटियां चुनती हैं बेहतर कॅरियर

कुछ साल पहले ब्रिटिश कोलंबिया यूनिवर्सिटी ने एक स्टडी की थी। विषय था, बेटियों की जिंदगी पर पिता का प्रभाव। अमेरिका के एक बड़े अखबार में जब ये स्टडी छपी तो उसकी हेडलाइन थी- 'जब पिता करते हैं घर के काम तो बेटियां चुनती हैं बेहतर कॅरिअर।' ये स्टडी तमाम आंकड़ों और उदाहरणों से यह साबित कर रही थी कि लड़कियों की जिंदगी पर पिता का प्रभाव बहुत गहरा होता है। बराबरी और आत्मसम्मान का पाठ बेटियां किताबों में पढ़कर नहीं सीखतीं, बल्कि पिता के व्यवह्मर से सीखती हैं। दंगल फिल्म तो याद होगी आपको। फोगाट बहनों की कह्मनी और उनसे भी ज्यादा उस बूढ़े पिता मह्मवीर सिंह फोगाट की कहानी, जिसने समाज के ताने सहे, गालियां खाई, लेकिन बेटियों से पहलवानी करवाना नहीं छोड़ा। उसके बाद तो जो हुआ, वहइतिह्मस है। इन दिनों पाकिस्तान के मशहूर क्रिकेटर शाहिद आफरीदी की आत्मकथा आई है। नाम है ‘गेम चेंजर।' ये क्रिकेटर खुद चार बेटियों के पिता हैं और अपनी किताब में अपनी बेटियों के बारे में लिखते हैं, 'बेटियों को मेरी इजाजत है कि वे कोई भी स्पोर्ट खेल सकती हैं, लेकिन वह स्पोर्ट इंडोर होना चाह्मिए।
क्रिकेट मेरी बेटियों के लिए नहीं है। मेरी बेटियां किसी भी पब्लिक स्पोर्ट एक्टिविटी में शामिल नीं होंगी।' जरूरी नहीं कि क्रिकेटर की बेटी क्रिकेटर बने। मुमकिन है, उन चारों की इस खेल में कोई रुचि ही न हो। लेकिन एक पिता का बेटी के खेलने और अपने मन की राह चुनने से पहले
 यह फरमान जारी कर देना कि वो ये खेल कभी नहीं खेलेंगी. काफी दिक्कत तलब है।
 और अभी जब था। चाहे वे फोगाट बहनों के पिता सें, साइना नेहवाल के पिता या मलाला युसुफजई के पिता। जब पूरा खेवर पख्तून मलाला के स्कूल जाने के खिलाफ था
, पिता ने बेटी का हाथ थामा और कहा, 'तू जा, मैं हूँ, तेरे साथ।' ये पिता का साथ होना वड़ी गहरी बात है। अब तो विज्ञान भी इस बात की तस्दीक कर रहा है कि बेटियों के मनोविज्ञान पर पिता का मां से ज्यादा गहरा असर होता है।
था। चाहे वे फोगाट बहनों के पिता सें, साइना नेहवाल के पिता या मलाला युसुफजई के पिता। जब पूरा खेवर पख्तून मलाला के स्कूल जाने के खिलाफ था, पिता ने बेटी का हाथ थामा और कहा, 'तू जा, मैं हूँ, तेरे साथ।' ये पिता का साथ होना वड़ी गहरी बात है। अब तो विज्ञान भी इस बात की तस्दीक कर रहा है कि बेटियों के मनोविज्ञान पर पिता का मां से ज्यादा गहरा असर होता है। अगर आप भी एक बेटी के पिता हैं तो समझ लीजिए कि बेटी अपने जीवन में पुरुष के आदर्श के लिए आपको ही देख रही है। वो आपसे ही सीख रही है। आप कहेंगे, तू उड़, डर मत, मैं हूं संभाल लूंगा। तो वह पूरा आसमान नापकर घर आएगी और आपके घोसले में चैन से सो जाएगी। आप से उसकी हिम्मत हैं और आप ही उसकी कमजोरी भी। आप बेटी के पिता हैं।

अगर आप भी एक बेटी के पिता हैं तो समझ लीजिए कि बेटी अपने जीवन में पुरुष के आदर्श के लिए आपको ही देख रही है। वो आपसे ही सीख रही है। आप कहेंगे, तू उड़, डर मत, मैं हूं संभाल लूंगा। तो वह पूरा आसमान नापकर घर आएगी और आपके घोंसले में.चैन से सो जाएगी। आप से उसकी हिम्मत हैं और आप.ही उसकी कमजोरी भी। आप बेटी के पिता हैं।

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