Saturday, May 11, 2019

_ मैनिट को डेढ़ करोड़ रुपए ब्याज के साथ कांट्रेक्टर को करना होगा भुगतान

मौलाना आजाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (मैनिट) में पिछले तीन साल से चल रहे निर्माण के विवाद में हाईकोर्ट द्वारा नियुक्त आर्बिट्रेटर ने । अपना फैसला सुना दिया है। मैनिट की किसी भी दलील को आर्बिट्रेटर ने स्वीकार नहीं किया। इसके कारण मैनिट के अधिकारियों की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं। क्योंकि, करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद भी फैसला मैनिट के खिलाफ आया है। इसमें मैनिट को 75 प्रतिशत ब्याज के साथ कांट्रेक्टर को भुगतान करने के निर्देश दिए गए हैं।खास बात यह है कि मैनिट को मानसिक प्रताड़ना के तौर 7.45 लाख का हर्जाना भी देना होगा। इस मामले में मैनिट ने 24.57 करोड़ की राशि क्लेम की थी। इसे पूरी तरह से खारिज कर दिया है।

इस मामले में कांट्रेक्टर (साहेब इंफ्रास्ट्रक्चरप्राइवेट लिमि) की ओर से ह्यईकोर्ट में अपील कर इस मामले में से 10 प्रतिशत के हिसाब से 25 हजार रोजाना ब्याज देना होगा। इस पूरे मामले में अधिकारियों द्वारा अपनी जिम्मेदारी से बचने के कारण मैनिट को यह नुकसान उठाना पड़ेगा। वहीं, छात्रों के लिए लगभग 48 करोड़ की बिल्डिंग का उपयोग नहीं किया जा रहा है। ऐसे में अब संबंधितों पर
कार्रवाई कर वसूली करने की मांग भी उठ सकती है। ताकि, इस नुकसान की भरपाई हो सके। नियुक्त करने की मांग की  थी। इसके बाद रिटायर्ड डिस्ट्रिक्ट जज रेणु शर्मा ने बतौर आर्बिट्रेटर दोनों पक्षों को सुनकर हाल से में फैसला सुनाया है। इस मामले में कांट्रेक्टर को7.42 करोड़ रुपए का भुगतान 7.5 प्रतिशत ब्याज के साथ करना है। यानी लगभग 1.50 करोड़ रुपए का ब्याज भी देना होगा। इसका भुगतान नीं ह्येने पर मैनिट पर रोजाना का 18500 रुपए ब्याज चढ़ता जा रहा है। वहीं 2 अगस्त के बादसे 10 प्रतिशत के हिसाब से 25 हजार रोजाना ब्याज देना होगा। इस पूरे मामले में अधिकारियों द्वारा अपनी जिम्मेदारी से बचने के कारण मैनिट को यह नुकसान उठाना पड़ेगा। वहीं, छात्रों के लिए लगभग 48 करोड़ की बिल्डिंग का उपयोग नहीं किया जा रहा है। ऐसे में अब संबंधितों पर कार्रवाई कर वसूली करने की मांग भी उठ सकती है। ताकि, इस नुकसान की भरपाई हो सके।

मैनिट को ही करना है पूरी कानूनी कार्रवाई का भुगतान भी

लापरवाही के कारण आर्बिट्रेटर ने मैनिट कोकानूनी कार्रवाई में आने वाले पूरे खर्च काभुगतान करने को कहा है। मैनिट को अपने हिस्से की (मेमो कॉस्ट) के तौर पर 20.37 लाख रुपए
का भुगतान तो करना ही पड़ेगा। साथ ही कांट्रेक्टर के हिस्से आने वाली इतनी राशि का भार भी उठाना होगा। मेमो कॉस्ट के तौर पर कुल 40.67 लाख का भुगतान मैनिट को ही करना होगा।

7500 रुपए रोज के हिसाब से किया कंसल्टेंट को भुगतान

मैनिट के अधिकारी चाहते तो इस पूरे मामले में निर्णय लेकर विवाद सुलझा सकते थे। लेकिन, ऐसा न कर कंसल्टेंसी ली गई। बीएसएनएल से कंसल्टेंसी लेकर लगभग 20 लाख रुपए
का भुगतान किया गया। वहीं, सीपीडब्ल्यूडी के रिटायर्ड स्पेशल डीजी बीएन मल्ह्यत्रा को 7500 रुपए रोजाना के हिसाब से 25 लाख से अधिक का भुगतान  किया गया

- दो करोड़ से अधिक का नुकसान

 मैट को इस मामले में दो करोड़ का नुकसान  हो रहा है। रनिंग बिल के हिसाब से 1.42 करोड  रुपए ताज का भुगतान होना था। लेकिन, अब इस पर डेढ़ करोड़ का व्याज,   मानसिक प्रताड़ना, कानूनी खच आदि शामिल है। इसके अलवा लखों में देर खर्च भी हुआ है।

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