• फाइजर, नोवार्टिस, टेवा के खिलाफ गैरकानुनी कदम उठाने की शिकायत
हीथर मर्फी प्रमुख दवा कंपनियों ने जेनरिक दवाइयों के मूल्य 1000% तक बढ़ा दिए हैं। अमेरिका के 44 राज्यों द्वारा शुक्रवार को दाखिल एक मुकदमे के अनुसार टेवा, फाइजर, नोवार्टिस और माइलान ने साजिश कर कीमतें बढ़ाई हैं। शिकायत में कहा गया है, इससे 100 से अधिक जेनरिक दवाइयां प्रभावित हुई हैं। ये दवाइयां हैं- एचआईवी, दमा, हाई कोलेस्ट्राल, ओरल एंटी बायोटिक्स, खून पतला करने वाली,
कैंसर, गर्भनिरोधक और एंटी डिप्रेसेंट।। न्यूजर्सी के अटार्नी जनरल गुरवीर ग्रेवाल ने एक बयान में कहा, हम सब जानते हैं, पिसक्रिप्शन दवाएं महंगी होती हैं।
जेनरिक दवा कंपनियों के बीच अवैध साजिश के कारण दवाओं के मूल्य बढे हैं। अदालत में पेश दस्तावेजों में राज्यों
के प्रोसीक्यूटरों ने कहा, एक दर्जन से अधिक जेनरिक दवा कंपनिया, उनके सेल्स, मार्केटिंग और दाम तय करने वाले
अधिकारी मूल्य तय करने की स्कीम में शामिल हैं। षड्यंत्रकारी जानते थे कि प्रतिस्पर्धा ध्वस्त करने के उनके प्रयास गैरकानूनी हैं इसलिए उन्होंने लिखित जानकारी दर्ज नहीं की है।
इसकी बजाय यह सब लंच, डिनर, गोल्फ आउटिंग और । अन्य कार्यक्रमों में किया गया। शिकायत के अनुसार संबंधित गतिविधियां जुलाई 2013 से जनवरी 2015 के बीच हुई। उस समय टेवा ने 112 जेनरिक दवाओं के 400 फार्मूलेशन.की कीमतें बढ़ाई थी। आरोप है, प्रतिस्पर्धा कंपनियों के बीच इस तरह मूल्य बढ़ाने पर सहमति बनी कि हर कंपनी जेनरिक दवा बाजार का अच्छा हिस्सा बनाए रखे। इसके साथ कंपनियों ने जितना संभव हो सका उतनी दवाओं के दाम बढ़ाए। हालांकि, शिकायत में.पेनसिल्वानिया स्थित टेवा फार्मास्युटिकल्स, यूएसए को साजिश का सूत्रधार बताते हुए कह्म है, यह आचरण पूरी इंडस्ट्री में व्याप्त है।सामान्य या जेनरिक दवा बिना किसी पेटेंट के बनाई और वितरित की जाती है। यह ब्रांडेड नहीं होती।.है। जेनरिक दवाइयां क्वालिटी में ब्रांडेड दवाओं से कम नहीं होती हैं। ये ब्रांडेड दवाइयों के समान असरकारक हैं।
कई स्तर पर कंपनियों के कामकाज की छानबीन
इजरायल की टेवा फार्मास्युटिकल इंडस्ट्री विश्व की सबसे बड़ी
जेनरिक दवा निर्माता कंपनियों में शामिल है। फरवरी 2018 में विलसन जैसी दुर्लभ बीमारी के इलाज में काम आने वाली 100 गोलियों की कीमत 12 लाख 85000 रुपए करने पर कंपनी की कड़ी आलोचना हुई थी। एपिपेन के दो इंजेक्शन का मूल्य 6993 रु. से बढ़ाकर 41950रु. करने के बाद माइलान को आलोचना झेलनी पड़ी थी। वैसे भी, अमेरिकी सांसद दवा कंपनियों के खिलाफ व्यापक छानबीन कर रहे हैं।
हीथर मर्फी प्रमुख दवा कंपनियों ने जेनरिक दवाइयों के मूल्य 1000% तक बढ़ा दिए हैं। अमेरिका के 44 राज्यों द्वारा शुक्रवार को दाखिल एक मुकदमे के अनुसार टेवा, फाइजर, नोवार्टिस और माइलान ने साजिश कर कीमतें बढ़ाई हैं। शिकायत में कहा गया है, इससे 100 से अधिक जेनरिक दवाइयां प्रभावित हुई हैं। ये दवाइयां हैं- एचआईवी, दमा, हाई कोलेस्ट्राल, ओरल एंटी बायोटिक्स, खून पतला करने वाली,
कैंसर, गर्भनिरोधक और एंटी डिप्रेसेंट।। न्यूजर्सी के अटार्नी जनरल गुरवीर ग्रेवाल ने एक बयान में कहा, हम सब जानते हैं, पिसक्रिप्शन दवाएं महंगी होती हैं।
जेनरिक दवा कंपनियों के बीच अवैध साजिश के कारण दवाओं के मूल्य बढे हैं। अदालत में पेश दस्तावेजों में राज्यों
के प्रोसीक्यूटरों ने कहा, एक दर्जन से अधिक जेनरिक दवा कंपनिया, उनके सेल्स, मार्केटिंग और दाम तय करने वाले
अधिकारी मूल्य तय करने की स्कीम में शामिल हैं। षड्यंत्रकारी जानते थे कि प्रतिस्पर्धा ध्वस्त करने के उनके प्रयास गैरकानूनी हैं इसलिए उन्होंने लिखित जानकारी दर्ज नहीं की है।
इसकी बजाय यह सब लंच, डिनर, गोल्फ आउटिंग और । अन्य कार्यक्रमों में किया गया। शिकायत के अनुसार संबंधित गतिविधियां जुलाई 2013 से जनवरी 2015 के बीच हुई। उस समय टेवा ने 112 जेनरिक दवाओं के 400 फार्मूलेशन.की कीमतें बढ़ाई थी। आरोप है, प्रतिस्पर्धा कंपनियों के बीच इस तरह मूल्य बढ़ाने पर सहमति बनी कि हर कंपनी जेनरिक दवा बाजार का अच्छा हिस्सा बनाए रखे। इसके साथ कंपनियों ने जितना संभव हो सका उतनी दवाओं के दाम बढ़ाए। हालांकि, शिकायत में.पेनसिल्वानिया स्थित टेवा फार्मास्युटिकल्स, यूएसए को साजिश का सूत्रधार बताते हुए कह्म है, यह आचरण पूरी इंडस्ट्री में व्याप्त है।सामान्य या जेनरिक दवा बिना किसी पेटेंट के बनाई और वितरित की जाती है। यह ब्रांडेड नहीं होती।.है। जेनरिक दवाइयां क्वालिटी में ब्रांडेड दवाओं से कम नहीं होती हैं। ये ब्रांडेड दवाइयों के समान असरकारक हैं।
कई स्तर पर कंपनियों के कामकाज की छानबीन
इजरायल की टेवा फार्मास्युटिकल इंडस्ट्री विश्व की सबसे बड़ी
जेनरिक दवा निर्माता कंपनियों में शामिल है। फरवरी 2018 में विलसन जैसी दुर्लभ बीमारी के इलाज में काम आने वाली 100 गोलियों की कीमत 12 लाख 85000 रुपए करने पर कंपनी की कड़ी आलोचना हुई थी। एपिपेन के दो इंजेक्शन का मूल्य 6993 रु. से बढ़ाकर 41950रु. करने के बाद माइलान को आलोचना झेलनी पड़ी थी। वैसे भी, अमेरिकी सांसद दवा कंपनियों के खिलाफ व्यापक छानबीन कर रहे हैं।
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