डेटा पर नियंत्रण होने के चलते ये कंपनियां ज्यादा
शक्तिशाली होंगी बीते दो दशक में डिजिटल सर्विसेज ने इकोनॉमी और लोगों के जीवन को काफी बदला है। लेकिन एक इंडस्ट्री अब भी खुद को बनाए रखने में कामयाब रहीं है- बैंकिंग। अमीर देशों में लोगों का बैंक में लाइन में खड़े होना, बैंक को डाक के जरिए पत्र भेजना और चेक से लेन-देन करना आम बात है। लेकिन दूसरी जगहों पर टेक्नोलॉजी बैंकिंग को बदल रही है। एशिया में 100 करोड़ से ज्यादा लोग पेमेंट ऐप का इस्तेमाल कर रहे हैं। 49% अमेरिकी फोन पर बैंकिंग करते हैं
बैंक के लड़खड़ाने से इकोनॉमी बिगड़ने लगती है। यह हम 2008- 09 के आर्थिक संकट में देख चुके हैं। इसलिए इसमें बदलाव का असर भी ज्यादा होता है। इस बदलाव के बहुत फायदे हैं। यूजर-फ्रेंडली और खुले बैंकिंग सिस्टम में रिस्क कम होता है। चीन में अलीबाबा और टेनसेंट और मलेशिया- सिंगापुर जैसे दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में ग्रेव जैसी कंपनियां पेमेंट ऐप के साथ ई-कॉमर्स, चैट और टैक्सी जैसी सर्विसेज दे रही हैं।
बिना ब्रांच के, सिर्फ मोबाइल पर चलने वाले नियोबैंक ग्राहकों को तेजी से आकर्षित कर रहे हैं। ये वे सभी सर्विसेज दे रहे हैं जो बैंक देते हैं। बदलाव की रफ्तार | आगे और बढ़ेगी। ब्रिटेन में 18-23 साल के 15% युवा नियोबैंक का इस्तेमाल करते हैं।
इस बदलाव के बहुत फायदे हैं। ब्रांच कम होने से खर्च कम होंगे। | अगर दुनिया के सभी लिस्टेड बैंक
खर्च एक तिहाई कम करें तो पृथ्वी पर हर व्यक्ति के लिए 5,500 रुपए की वचत होगी। बैंक के जरिए पैसे ट्रांसफर
करने की तुलना में एप के जरिए यह ज्यादा आसान होगा। सर्विसेज बेहतर होंगी और फ्रॉड को जल्दी पकड़ा जा सकेगा। चीन में ये बैंक उन लोगों को भी कर्ज दे रहे हैं जिनकी पारंपरिक बैंक उपेक्षा करते थे। लेकिन बदलाव के
खतरे भी हैं। चुनिंदा कंपनियां अधिक शक्तिशाली हो जाएंगी। फेसबुक और किसी बड़े बैंक के मिले-जुले रूप की कल्पना कीजिए। उसके पास कस्टमर | बिहेवियर का पूरा डेटा होगा। वह इसका इस्तेमाल विरोधी कंपनियों के खिलाफ कर सकती है।
85% अमेरिकी युवाओं को तेज़ सर्विस के कारण मोबाइल बैंकिंग पसंद 18-30 की उम्र के लोग मोबाइल पर पढ़ने, चैट करने, गेम खेलने, म्यजिक सनने, वीडियो देखने, खाना ऑर्डर जैसे काम करते हैं। कंसल्टेंसी फर्म रेडॉन के अनुसार 85% अमेरिकी मिलेनियल (1981 से 1995 के बीच जन्म लेने वाले) मोबाइल बैंकिंग करते हैं। 1996 के बाद पैदा होने वालों में यह अनुपात ज्यादा है। युवा तेज और आसान सर्विस चाहते हैं। बैंकों पर इनकी निर्भरता कम हुई है। बैंकरेट डॉट कॉम के अनुसार अमेरिका के एक तिहाई मिलेनियल के पास ही क्रेडिट या डेबिट कार्ड है।
शक्तिशाली होंगी बीते दो दशक में डिजिटल सर्विसेज ने इकोनॉमी और लोगों के जीवन को काफी बदला है। लेकिन एक इंडस्ट्री अब भी खुद को बनाए रखने में कामयाब रहीं है- बैंकिंग। अमीर देशों में लोगों का बैंक में लाइन में खड़े होना, बैंक को डाक के जरिए पत्र भेजना और चेक से लेन-देन करना आम बात है। लेकिन दूसरी जगहों पर टेक्नोलॉजी बैंकिंग को बदल रही है। एशिया में 100 करोड़ से ज्यादा लोग पेमेंट ऐप का इस्तेमाल कर रहे हैं। 49% अमेरिकी फोन पर बैंकिंग करते हैं
बैंक के लड़खड़ाने से इकोनॉमी बिगड़ने लगती है। यह हम 2008- 09 के आर्थिक संकट में देख चुके हैं। इसलिए इसमें बदलाव का असर भी ज्यादा होता है। इस बदलाव के बहुत फायदे हैं। यूजर-फ्रेंडली और खुले बैंकिंग सिस्टम में रिस्क कम होता है। चीन में अलीबाबा और टेनसेंट और मलेशिया- सिंगापुर जैसे दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में ग्रेव जैसी कंपनियां पेमेंट ऐप के साथ ई-कॉमर्स, चैट और टैक्सी जैसी सर्विसेज दे रही हैं।
बिना ब्रांच के, सिर्फ मोबाइल पर चलने वाले नियोबैंक ग्राहकों को तेजी से आकर्षित कर रहे हैं। ये वे सभी सर्विसेज दे रहे हैं जो बैंक देते हैं। बदलाव की रफ्तार | आगे और बढ़ेगी। ब्रिटेन में 18-23 साल के 15% युवा नियोबैंक का इस्तेमाल करते हैं।
इस बदलाव के बहुत फायदे हैं। ब्रांच कम होने से खर्च कम होंगे। | अगर दुनिया के सभी लिस्टेड बैंक
खर्च एक तिहाई कम करें तो पृथ्वी पर हर व्यक्ति के लिए 5,500 रुपए की वचत होगी। बैंक के जरिए पैसे ट्रांसफर
करने की तुलना में एप के जरिए यह ज्यादा आसान होगा। सर्विसेज बेहतर होंगी और फ्रॉड को जल्दी पकड़ा जा सकेगा। चीन में ये बैंक उन लोगों को भी कर्ज दे रहे हैं जिनकी पारंपरिक बैंक उपेक्षा करते थे। लेकिन बदलाव के
खतरे भी हैं। चुनिंदा कंपनियां अधिक शक्तिशाली हो जाएंगी। फेसबुक और किसी बड़े बैंक के मिले-जुले रूप की कल्पना कीजिए। उसके पास कस्टमर | बिहेवियर का पूरा डेटा होगा। वह इसका इस्तेमाल विरोधी कंपनियों के खिलाफ कर सकती है।
85% अमेरिकी युवाओं को तेज़ सर्विस के कारण मोबाइल बैंकिंग पसंद 18-30 की उम्र के लोग मोबाइल पर पढ़ने, चैट करने, गेम खेलने, म्यजिक सनने, वीडियो देखने, खाना ऑर्डर जैसे काम करते हैं। कंसल्टेंसी फर्म रेडॉन के अनुसार 85% अमेरिकी मिलेनियल (1981 से 1995 के बीच जन्म लेने वाले) मोबाइल बैंकिंग करते हैं। 1996 के बाद पैदा होने वालों में यह अनुपात ज्यादा है। युवा तेज और आसान सर्विस चाहते हैं। बैंकों पर इनकी निर्भरता कम हुई है। बैंकरेट डॉट कॉम के अनुसार अमेरिका के एक तिहाई मिलेनियल के पास ही क्रेडिट या डेबिट कार्ड है।
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